समाज की प्रगति में ग्रंथालयों की भूमिका
सेतकुमार मल्होत्रा, अशोक कुमार
ग्रंथपाल, रामचण्डी महाविद्यालय सरायपाली, जिला - महासमुन्द (छ.ग.)
ग्रंथपाल, प्रतिभा कॉलेज ऑफ एजूकेषन, जिला - महासमुन्द (छ.ग.)
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ABSTRACT:
समाज तथा गं्रथालयों का गहन सम्बन्ध है। समाज ऐसे लोगों का एक समूह होता है जो किसी विषेष प्रयोजन अथवा कार्य के लिए परस्पर मेल जोल रखते हैं और कुछ नियमों तथा परम्पराओं में भागीदार होते हैं। समाज का शाब्दिक अर्थ है; समुदाय या जनता या सामान्य लोग जो एक क्षेत्र में अथवा एक काल में इकट्ठे रहते हैं। ग्रंथालय लोगों से सम्बध्द होने के नाते सामाजिक संस्थाएँ है। गं्रथालयों का अस्तित्व ही समाज के लिए होता है। मानव सभ्यता पर दृष्टिपात करने से पता चलता है कि ग्रंथालय सभ्य समाज का एक अभिन्न अंग रहे हैं। समाज सेवा ही ग्रंथालयों का उद्देष्य है। ग्रंथालयों के प्रकार, विषेषतायें, प्रयोजन, कार्य तथा सेवाएँ सभी समाज की आवष्यकताओं के अनुसार निर्धारित होते हैं। ग्रंथालयों ने समाज के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक तथा सांस्कृतिक विकास में सदैव एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज के सभ्य समाज के निर्माण में ग्रंथालयों का सराहनीय योगदान रहा है।
KEYWORDS: ग्रंथालय, समाज, शोध और अनुसंधान, सांस्कृतिक सूचना संचार, धार्मिक, आध्यात्मिक।
प्रस्तावना:-
ग्रंथालय समाज के चहुमुखी विकास में एक महत्वपूर्ण योगदान करता है। समाज लोगों का एक समूह होता है जो किसी एक क्षेत्र अथवा काल में रहते है और परस्पर कुछ नियमों, रिति - रिवाजों तथा परम्पराओं से बंधे होते है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि समज व्यक्तियों, उनके क्रियाकलापों तथा आस्थाओं का एकीकृत रूप होता है। आज का लोकतांत्रिक युग समतामुलक समाज की वकालत करता है। जिसमें प्रत्येक मानव को अपने विकास एवं षिक्षा के लिए बिना किसी भेदभाव के समान अवसर प्रदान होने चाहिए। तथा विभिन्न तरह के सुचनाओं का उपयोग मानवीय विकास के लिए बिना किसी भेदभाव के होने चाहिए। ग्रंथालयों द्वारा पुस्तको एवं सुचनाओं का संग्रहण, व्यवस्थापन और प्रसारण बिना किसी भेदभाव के समस्त उपयोगकर्ताओं को किया जाता है।
अध्ययन के उद्देष्य:-
प्रस्तुत अध्ययन के निम्नलिखित उद्देष्य है:-
1. समाज की प्रगति में ग्रंथालयों की भुमिका का अध्ययन करना।
2. समाज के सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक तथा बौध्दिक जीवन के विकास में ग्रंथालय की भूमिका का अध्ययन करना।
3. समाज के षिक्षा संस्कृति और मनोरंजन में ग्रंथालयों के महत्व एवं भूमिका का अध्ययन करना।
4. समाज के प्रजातांत्रिक मूल्यों के विकास मंे ग्रंथालयों के महत्व का अध्ययन करना।
5. समाज को एक ज्ञान निधि के रूप में विकसित करने में ग्रंथालय की भुमिका का अध्ययन करना।
ग्रंथालय से तात्पर्य :-
ग्रंथालय (स्पइतंतल) षब्द लैटिन भाषा के शब्द ष्स्पइतंतपंष् लाईब्रेरिया से लिया गया है। ‘लाईब्रेरिया’ उस स्थान का नाम है जहाँ पर पुस्तकें अथवा अन्य मुद्रित तथा लिखित सामग्री सुरक्षा से रखी जाती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं की ग्रंथालय वह स्थान है जहाँ पर ज्ञान एवं सुचना प्रद सामग्री को एक व्यवस्थित ढ़ग से रखा जाता है ताकि उसका अधिकतम उपयोग हो सके।
ग्रंथालय के उद्देष्य
ग्रंथालय के उद्देष्य निम्नलिखित है:-
1. समाज के सभी व्यक्तियों को उनके स्वास्थ्य एवं बौध्दिक विकास के लिए पाठ्य एवं अन्य सुचनाप्रद सामग्री उपलब्ध कराना।
2. समाज में ज्ञान का प्रसार करना।
3. लोगों को जीवन पर्यन्त स्वषिक्षा प्रदान करना।
4. खाली समय के सदुपयोग के अवसर प्रदान करना।
गं्रथालय के कार्य
ग्रंथालय के कार्य निम्नलिखित है:-
(1) ग्रंथालय में ग्रंथों एवं ग्रंथेतर अभिलेखों को उपलब्ध कराने में सहायता प्रदान करना ।
(2) ज्ञान, षिक्षा और संस्कृति के विकास और विस्तार मंे वृध्दि करना।
(3) समाज में औपचारिक और अनौपचारिक जीवन पर्यन्त स्व - षिक्षा की सुविधा प्रदान करना।
(4) समुदाय की संस्कृति को उन्नत बनाने में सुविधा प्रदान करना।
(5) शोध एवं अनुसंधान के विकास और विस्तार में सहायता करना।
समाज की प्रगति में ग्रंथालयों की भुमिकाः
समाज की प्रगति में ग्रंथालयों की निम्नलिखित भुमिका है:-
(1) सांस्कृतिक स्तर को समुन्नत करने के लिए ग्रंथालय:-
ग्रंथालय समाज मंे जनसाधारण की बुध्दि ज्ञान और सामाजिक स्तर को काफी हद तक बढ़ाते है। ये समुदाय के प्रत्येक व्यक्ति की सामान्य बुध्दि व ज्ञान को भी बढ़ाते है। ग्रंथालय पठन रूची का विकास करते है और व्यक्ति के सांस्कृतिक स्तर को बढ़ाकर उनके पढ़ने की रूचि में परिवर्तन भी लाते है।
(2) ग्रंथालय सुसंस्कृत नागरिक बनाने का साधन:-
एक सु-सभ्य समाज से यह अपेक्षा की जाती है कि उसका प्रत्येक नागरिक षिक्षित हो व षिक्षित समुदाय के मुल्यों और ग्रंथालय के महत्व से पूर्णतः अवगत हो। जहाँ कही भी सभ्यता है वहाँ ग्रंथ अवष्य होंगे और जहाँ ग्रंथ होगे वहाँ ग्रंथालय अवष्य होंगे।
(3) ग्रंथालय पुस्तकों के अध्ययन की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करता है:- एक सामाजिक संस्था के रूप में ग्रंथालय न केवल पाठकों को पुस्तकें प्रदान करके संतुष्ट करते हैं बल्कि उनके उपयोग की आकांक्षा एवं माँग की प्रवृत्ति को भी प्रोत्साहित करते हैं। लोगों में अध्ययन की प्रवृत्तियों को प्रोत्साहित करते हुए वह उन्हें ग्रंथालयोंन्मुखी बनाने व पुस्तकों के प्रति उनके हृदय में प्रेम भावना को जागृत करता है।
(4) ग्रंथालय सामाजिक सांजस्य की सुविधाएँ प्रदान करता है:- ग्रंथालय सामाजिक संस्था के रूप में उपयोगकर्ताओं में आपसी सम्पर्क स्थापित करने की सुविधा प्रदान करता है। ग्रंथालय समाज में पारस्परिक मेल मुलाकात के अवसर प्रदान करता है।
(5) ग्रंथालय ज्ञान संरक्षण करता है:-ग्रंथालय पुरालेखों और दुर्लभ प्रलेखों का संरक्षण साहित्यिक विरासत के रूप में भावी पीढ़ी के लिए रखता है। यह मानवता के साहित्यिक अवषेषों को विभिन्न भौतिक रूप में अनुसंधान के लिए संकलन रखता है।
(6) ग्रंथालय समाज के प्रजातांत्रिक मूल्यों के विकास में सहायक है:- प्रजातांत्रिक देषों और समाजों द्वारा प्रत्येक नागरिक को अपने विकास एवं षिक्षा के लिए बिना किसी भेदभाव के समान अवसर की वकालत करता है। तथा सुचनाओं का उपयोग मानवीय विकास के लिए बिना किसी भेदभाव के होने चाहिए इस बात पर बल देता है।
(7) ग्रंथालय समाज मंे सुचना के संचार मंे सहायक है:- ग्रंथालय द्वारा सुचनाआंे और प्रलेखों का सग्रहण और व्यवस्थापन किया जाता है जिन कारण यह व्यवस्थित सुचनाओं का विषाल भंडार होता है तथा उपयोगकर्ता के आवष्यकतानुसार उन सुचनाओं का प्रसारण भी किया जाता है।
(8) गं्रथालय शोध और अनुसंधान के कार्य में सहायक है:- आधुनिक विष्व और समाज अपने विकास के लिए शोधों पर आश्रित है और शोध कार्यों में सुचना और प्रलेखों की महत्ता जगजाहिर है। ग्रंथालयांे द्वारा सुचनाओं और प्रलेखों का संग्रहण, व्यवस्थापन और प्रसारण किया जाता है। जिसका उपयोग शोध कार्यों हेतु अति महत्तपूर्ण है तथा ये शोध कार्यो के आधार स्तम्भ है।
(9) समाज को षिक्षित करने में ग्रंथालय का योगदान:- ग्रंथालय का सभी प्रकार की षिक्षा - औपचारिक तथा अनौपचारिक षिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान है। यह षिक्षा क्षेत्र में आधार स्तंभ की तरह कार्य करता है। और पुस्तकालय के बिना आधुनिक षिक्षा की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
(10) धार्मिक तथा अध्यात्मिक कार्यों में गं्रथालय का योगदान:- ग्रंथालय में कई तरह की पुस्तके होती है। जिसमें कई तरह के सुचनात्मक मनोरंजनात्मक, प्रेरणात्मक आदि जानकारी दी गई होती है। प्रेरणात्मक पुस्तक प्राय: धर्म तथा अध्यात्मिक बातों पर आधारित होता है। इस तरह के पुस्तकों का संग्रह करके ग्रंथालयों द्वारा धार्मिक तथा अध्यात्मिक कार्यों में योगदान दिया जाता है।
निष्कर्ष:-
आधुनिक युग जो सुचना समाज के रूप में जाना जाता हैं। और इसके सदस्य होने के नाते हम अच्छी तरह जानते है कि आधुनिक समाज में मनुष्य की आवष्यकता में सबसे प्रमुख आवष्यकता षिक्षा और सुचना हैं। बिना षिक्षा के मनुष्य अपना विकास नहीं कर सकता हैं, और न ही वह समाज का उत्थान कर सकता हैं। मनुष्य के आत्मविकास में जितनी भुमिका षिक्षा की हैं, उतनी ही भूमिका समाज की प्रगति में ग्रंथालयों की हैं, जिस प्रकार षिक्षा के बिना मनुष्य का विकास नहीं हो सकता हैं, उसी प्रकार ग्रंथालयों के बिना समाज की प्रगति की कल्पना करना मुष्किल हैं। इस तरह से हम देखते हैं कि आज के सभ्य समाज के निर्माण में गं्रथालयों का सराहनीय योगदान रहा हैं।
संदर्भ ग्रंथ सूची:-
1. सैनी.ओ.पी., ग्रंथालय एवं समाज, वाई. के. पब्लिषर, आगरा
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6- www.IGNOU.AC.IN
7- www.NIOS.AC.IN
Received on 22.03.2022 Modified on 24.04.2022
Accepted on 29.05.2022 © A&V Publications All right reserved
Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2022; 10(2):86-88.